जिद्दु कृष्णमूर्ति का जीवन परिचय J Krishnamurti ka jeevan parichay

अध्यात्म की दुनिया से जुड़े लोगों के लिए जिद्दु कृष्णमूर्ति कोई नया नाम नहीं है। जिन्हें वर्ल्ड गुरु यानि वैश्विक गुरु के तौर पर जाना जाता है। जिद्दु कृष्णमूर्ति ना केवल एक महान दार्शनिक, बल्कि एक महान लेखक और अध्यात्मिक विचारक भी थे। जिन्होंने भारत समेत दुनियाभर का ज्ञान और अध्यात्म से परिचय कराया।

Jiddu Krishnamurti

इतना ही नहीं, अपने विचारों और प्रवचनों के कारण जिद्दु कृष्णमूर्ति आज भी बेहद सम्मानित व्यक्तित्व के तौर पर जाने जाते हैं।  हमारे आज के इस लेख में हम आपको जिद्दु कृष्णमूर्ति के जीवन से ही रूबरू कराने वाले हैं।

जे कृष्णमूर्ति का जीवन परिचय – J Krishnamurti Ka Jeevan Parichay

जिद्दु कृष्णमूर्ति यानि जे कृष्णमूर्ति का जन्म 12 मई 1895 को भारत के तमिलनाडु राज्य के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  इनके पिता का नाम जिद्दू नारायनिया और माता का नाम संजीवामा था।

इनके पिता एक थियोसौफिस्ट थे। अपने माता पिता की आठवीं संतान होने की वजह से इनका नाम भगवान श्री कृष्ण के नाम पर पड़ा।

जे कृष्णमूर्ति की माता की मृत्यु तभी हो गई थी, जब वह केवल 10 साल के थे।  ऐसे में उनका बचपन काफी संघर्ष भरा रहा,  लेकिन आरंभ से ही ज्ञान और अध्यात्म के माहौल में रहने की वजह से जे कृष्णमूर्ति ने अध्यात्म की दुनिया को ही अपना संसार बना लिया।

जिद्दू कृष्णमूर्ति द्वारा किए गए कार्य

जिद्दू कृष्णमूर्ति ने भारत समेत दुनिया भर में कई स्कूलों की स्थापना की। जिन्हें कृष्णमूर्ति फाउंडेशन के नाम से जाना जाता है। जिद्दू कृष्णमूर्ति ने समाज में परिवर्तन लाने वाली सोच और नए विचारों की खोज करने वाली शिक्षा का प्रचार प्रसार किया।

जिसके लिए उन्होंने भारत समेत यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि देशों में जाकर भी आध्यात्मिक विषयों और दर्शन को लोगों के बीच रखा। इस दौरान उन्होंने कई देशों की यात्राएं भी की। जिद्दु कृष्णमूर्ति के कार्यों से प्रभावित होकर थियोसोफिकल सोसायटी ने  उन्हें वर्ल्ड टीचर का दर्जा दिया, इसके साथ ही लोकप्रियता में भी विस्तार हुआ।

जिद्दु कृष्णमूर्ति के व्यक्तित्व को निखारने में सबसे बड़ा योगदान एनी बेसेंट का रहा,  जिन्होंने अध्यात्म और दर्शन को समझाने में जे कृष्णमूर्ति का पथ प्रदर्शन किया।

भारत समेत दुनिया भर के अनेक देशों में जे कृष्णमूर्ति ने हमेशा अध्यात्म, ध्यान और धर्म को संपूर्ण मनुष्यों के लिए आवश्यक बताया और जीवन भर इन्हीं का प्रचार प्रसार किया।

विद्यापति का जीवन परिचय

जिद्दू कृष्णमूर्ति द्वारा लिखी गई पुस्तकें कृष्णमूर्ति की नोटबुक और कृष्ण द फर्स्ट एंड लास्ट फ्रीडम को काफी लोकप्रियता मिली,  जिनकी प्रतियां आज भी बाजार में मौजूद है।

जिद्दु कृष्णमूर्ति के जीवन का अंतिम समय

जिद्दू कृष्णमूर्ति ने 90 वर्ष की उम्र में आखिरी सांसें ली। इस दौरान वह अपने जीवन के अंतिम क्षण में कैंसर की बीमारी से ग्रसित है। जिन्होंने 17 फरवरी 1986 को अपनी देह को त्याग दिया। 

कहा जाता है कि जिद्दू कृष्णमूर्ति ने हमेशा यह चाहा कि उनके मरने के बाद कोई भी उत्तराधिकारी ना हो, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि लोग उनकी संपत्ति का दुरुपयोग करें।

ऐसे में मां भारती का ये वीर पुत्र जिन्होंने जीवन भर अपने हाथ में दर्शन और अध्यात्म की लौ को जलाए रखा, आज भी उनके जीवन चरित्र से संपूर्ण विश्व प्रकाशित हो रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. जे कृष्णमूर्ति का जन्म कब हुआ था?

Ans: जे कृष्णमूर्ति का जन्म 12 मई 1895 को भारत के तमिलनाडु राज्य में हुआ था।

Q. जे कृष्णमूर्ति का पूरा नाम क्या है?

Ans: जे कृष्णमूर्ति का पूरा नाम जिद्दु कृष्णमूर्ति है।

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